सपनों की दुनिया से निकल कर देख
किसी रोती हुर्इ आँखों के लिए सहारा बन कर तो देखो.
कि कितना दर्द छुपा है उन आँखों में,
जरा उसके करीब जाकर तो देखो
कितनी यादें कैद हैं उसके मन के भीतरी तहखानों में
अनेकों सपने संजोये थे उसने भी अपने मन में,
सोचा था, जीवन बिताना है हमेषा किसी एक के संग में,
अपने ख्यालों के आसियाने में वो आज भी खोया रहता है
और अपने दिल पर हाथ रख कर बार बार ये कहता है
एक दिन वो लौट कर जरुर आएंगें,
और अपनी पलकों पर एक बार हमें फिर बिठाएंगें
लेकिन वो यह नही जानते कि,
सपने उसे हि कहते है जो कभी पुरे होते नही
चैन उन्हे तब तक नही मिलती,
जब तक मौत के सैयया मे वो सोते नही।
मौत के दरवाजे तक पहुँचना भी इतना आसान नही होता
और धरती के नीचे कभी आसमान नही होता
आसमां को अगर पाना है तो मौत से हाथ मिलाना होगा
और व्यर्थ ही अपने जीवन को गंवाना होगा
इसीलिए बेहतर यही होगा कि अपने दिल से उसकी यादों को हमेषा के लिए निकाल फेंक
दुनिया कितनी आगे बढ़ चुकी है जरा अपना मुंह मोंड़ कर तो देख ।
बजरंग यादव बेलादुला खर्राघाट रायगढ़